हाथरस। उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सरकारी योजनाओं और शिकायत निस्तारण व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्षों से पक्के और सुरक्षित आवास की उम्मीद लगाए बैठे रामपाल पुत्र सगवा आज भी जर्जर मकान में रहने को मजबूर हैं। उनका आरोप है कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर शिकायत दर्ज कराने के बावजूद आज तक उनकी समस्या का समाधान नहीं किया गया, जिसके चलते उनका पूरा परिवार भय और असुरक्षा के माहौल में जीवन बिताने को विवश है।
रामपाल का कहना है कि उन्होंने अपने आवास की समस्या को लेकर कई बार संबंधित विभागों और अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगाए। हर बार उन्हें जल्द कार्रवाई और समाधान का भरोसा दिया गया, लेकिन हकीकत में उनकी शिकायत केवल कागजों तक सीमित रह गई। उनका आरोप है कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज होने के बाद भी न तो मौके पर प्रभावी जांच की गई और न ही उन्हें किसी प्रकार की राहत उपलब्ध कराई गई।
पीड़ित के अनुसार उनका मकान पूरी तरह जर्जर हो चुका है। बरसात के दिनों में घर की छत कई स्थानों से टपकती है, जिससे पूरा घर पानी से भर जाता है। परिवार के लोगों को रातभर जागकर किसी तरह समय बिताना पड़ता है। मकान की दीवारों और छत की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। परिवार के सदस्यों में हर समय इस बात का डर बना रहता है कि कहीं मकान भरभराकर गिर न जाए।
रामपाल का कहना है कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह स्वयं नया मकान बनवाने में सक्षम नहीं हैं। उनका आरोप है कि यदि समय रहते प्रशासन उनकी शिकायत पर गंभीरता से कार्रवाई करता तो आज उन्हें इस तरह की कठिन परिस्थितियों में रहने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ता। उनका कहना है कि वर्षों से सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने के बाद भी उन्हें केवल आश्वासन ही मिला है, जबकि वास्तविक मदद आज तक नहीं मिली।
पीड़ित ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर दर्ज उनकी शिकायत की निष्पक्ष जांच कराकर उसका शीघ्र निस्तारण कराया जाए। साथ ही यदि वह पात्र हैं तो उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना या मुख्यमंत्री आवास योजना के अंतर्गत सुरक्षित और स्थायी आवास उपलब्ध कराया जाए, ताकि उनका परिवार भयमुक्त होकर सम्मानपूर्वक जीवन जी सके।
यह मामला एक बार फिर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण पर सवाल खड़े करता है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन रामपाल की वर्षों पुरानी समस्या को कितनी गंभीरता से लेते हुए उन्हें राहत दिलाने के लिए क्या कदम उठाता है या फिर यह मामला भी केवल फाइलों तक ही सीमित रह जाएगा।



