परिवार का दावा फोन छीनकर बार बार कॉल कर मिलने के लिए बनाया जा रहा था दबाव, तनाव में किशोरी ने फांसी लगाने की कोशिश की; थाने में शिकायत नहीं लिखने का भी आरोप
नई दिल्ली। मोहन गार्डन इलाके में किराए के मकान में रहने वाले बिहार निवासी परिवार ने 17 वर्षीय किशोरी के साथ कथित छेड़छाड़ और यौन शोषण के गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का कहना है कि किशोरी को करीब एक महीने तक परेशान किया गया और उसके साथ कथित तौर पर जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाए गए। डर और बदनामी के भय से किशोरी ने लंबे समय तक यह बात अपने माता-पिता तक नहीं बताई।
परिवार के मुताबिक धनवती देवी बिहार की रहने वाली हैं और पिछले करीब छह वर्षों से दिल्ली के मोहन गार्डन इलाके में किराए के मकान में रह रही हैं। उनकी 17 वर्षीय बेटी सुषमा कुमारी भी उनके साथ रहती है। परिवार जिस बिल्डिंग में किराए पर रहता है, उसके मालिक का नाम राजेंद्र बताया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार राजेंद्र के बेटे आदित्य का नाम इस मामले में सामने आया है।
परिवार का आरोप है कि 17 जुलाई के आसपास किशोरी को परेशान करने का सिलसिला शुरू हुआ। आरोप है कि किशोरी के साथ छेड़छाड़ की गई और उस पर जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाने का दबाव बनाया गया। परिवार का कहना है कि घटना से किशोरी इतनी डर गई कि उसने किसी को कुछ नहीं बताया।
आरोप है कि बाद में किशोरी का मोबाइल फोन भी उससे ले लिया गया। परिवार का कहना है कि उसी फोन के माध्यम से बार बार कॉल कर किशोरी को कथित तौर पर परेशान किया जाता था और उसे मिलने के लिए बुलाया जाता था। लगातार दबाव और डर के कारण किशोरी मानसिक रूप से बेहद परेशान हो गई।
परिवार के अनुसार तनाव की स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि किशोरी ने कथित तौर पर फांसी लगाकर जान देने की कोशिश की। हालांकि परिजनों की समय रहते नजर पड़ने से उसकी जान बच गई। परिवार ने उसे अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसकी मानसिक स्थिति को लेकर चिंता जताते हुए परिजनों से परेशानी का कारण पूछने की सलाह दी।
इसके बाद मां के सामने किशोरी ने कथित घटना के बारे में पूरी जानकारी बताई। परिवार का कहना है कि बेटी के खुलासा करने के बाद धनवती देवी उसे लेकर पुलिस थाने पहुंचीं और शिकायत करने का प्रयास किया।
परिजनों का आरोप है कि थाने में उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया और शिकायत दर्ज करने में भी कथित तौर पर आनाकानी की गई। परिवार का कहना है कि नाबालिग बच्ची के साथ कथित अपराध की जानकारी देने के बावजूद तत्काल प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
परिवार के अनुसार बाद में आदित्य को घटना के संबंध में थाने बुलाया गया था। परिजनों का दावा है कि वहां उसके साथ मारपीट हुई और उसने कथित तौर पर किशोरी के साथ गलत करने की बात स्वीकार की। हालांकि इस कथित स्वीकारोक्ति की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है और पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
पीड़ित परिवार का कहना है कि आरोपी पक्ष का सामाजिक और पारिवारिक प्रभाव होने के कारण वे खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं। परिवार ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और किशोरी के बयान के आधार पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए।
परिजनों का यह भी कहना है कि आरोपी बताए जा रहे आदित्य की शादी हो चुकी है और उसके दो बच्चे हैं। परिवार का आरोप है कि इसके बावजूद उसने किशोरी को कथित तौर पर परेशान किया। हालांकि आरोपी पक्ष की ओर से इन आरोपों पर कोई बयान उपलब्ध नहीं है।
मामले में सबसे बड़ा सवाल पुलिस की कथित निष्क्रियता को लेकर उठ रहा है। परिवार का कहना है कि जब किशोरी की मां शिकायत लेकर थाने पहुंचीं तो उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया गया। परिवार अब वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग कर रहा है ताकि नाबालिग के साथ कथित अपराध की निष्पक्ष जांच हो सके।
परिजनों ने किशोरी की सुरक्षा सुनिश्चित करने, उसके बयान दर्ज कराने, मोबाइल फोन और कॉल रिकॉर्ड की जांच कराने तथा घटनाक्रम से जुड़े लोगों से पूछताछ की मांग की है। परिवार का कहना है कि बच्ची पहले ही मानसिक तनाव से गुजर चुकी है और अब उसे किसी भी तरह के दबाव से बचाना जरूरी है।
इस पूरे मामले में लगाए गए यौन शोषण, छेड़छाड़, धमकी, मोबाइल छीनने और पुलिस द्वारा शिकायत दर्ज नहीं करने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। आरोपी आदित्य और उसके परिवार का पक्ष भी सामने नहीं आया है। नाबालिग की पहचान उसकी सुरक्षा और गोपनीयता के लिए बदलकर लिखी गई है। पुलिस जांच और आधिकारिक कार्रवाई के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।



