केरल के तिरुवनंतपुरम इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर 20 अक्टूबर को पांच घंटे तक फ्लाइट ऑपरेशन बंद रहेंगे। यह फैसला श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर की पारंपरिक ‘अल्पासी आराट्टू’ शोभायात्रा के लिए लिया गया है। इस दौरान मंदिर की शोभायात्रा एयरपोर्ट के रनवे से होकर गुजरेगी।
देश में एक ऐसा इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी है, जहां मंदिर की सदियों पुरानी परंपरा को निभाने के लिए विमानों की आवाजाही रोक दी जाती है। यहां न तो किसी तकनीकी खराबी के कारण उड़ानें रुकेंगी और न ही खराब मौसम इसकी वजह होगा। बल्कि, भगवान की एक पारंपरिक धार्मिक यात्रा के लिए एयरपोर्ट पर पांच घंटे तक विमान परिचालन बंद रहेगा। यह अनोखी परंपरा केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में आज भी निभाई जाती है।
दरअसल, तिरुवनंतपुरम इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर 20 अक्टूबर को शाम 4 बजे से रात 9 बजे तक सभी उड़ानों का परिचालन अस्थायी रूप से रोक दिया जाएगा। यह फैसला श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर की पारंपरिक ‘अल्पासी आराट्टू’ शोभायात्रा के लिए लिया गया है। इस दौरान मंदिर की शोभायात्रा एयरपोर्ट के रनवे से होकर गुजरेगी।
20 अक्टूबर को पांच घंटे तक बंद रहेंगी उड़ानें
तिरुवनंतपुरम इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (TIAL) के अनुसार, 20 अक्टूबर को शाम 4 बजे से रात 9 बजे तक विमान सेवाएं निलंबित रहेंगी। इस दौरान विमानों के टेकऑफ और लैंडिंग पर रोक रहेगी। एयरपोर्ट प्रशासन ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे एयरपोर्ट के लिए घर से निकलने से पहले अपनी संबंधित एयरलाइन से उड़ानों के समय की जानकारी जरूर ले लें। परिचालन में बदलाव के कारण कुछ उड़ानों के प्रस्थान और आगमन के समय में फेरबदल हो सकता है।
क्या है अल्पासी आराट्टू की परंपरा?
अल्पासी आराट्टू श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर से जुड़ी एक पारंपरिक धार्मिक शोभायात्रा है। इसमें मंदिर की मूर्तियों को विधि-विधान के साथ शंगुमुघम बीच ले जाया जाता है। वहां धार्मिक अनुष्ठान के तहत पवित्र स्नान कराया जाता है। इसके बाद मूर्तियों को वापस मंदिर लाया जाता है। इस शोभायात्रा की खास बात यह है कि इसका रास्ता तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट के रनवे से होकर गुजरता है। इसी वजह से धार्मिक यात्रा को रास्ता देने के लिए एयरपोर्ट पर विमान परिचालन रोकना पड़ता है।
1932 से जुड़ा है परंपरा का इतिहास
इस परंपरा की जड़ें तत्कालीन त्रावणकोर रियासत के दौर से जुड़ी हैं। इतिहासकारों के अनुसार, त्रावणकोर के तत्कालीन राजा श्री चिथिरा थिरुनाल ने यह व्यवस्था तय की थी कि एयरपोर्ट साल में 363 दिन आम लोगों और विमानों के लिए खुला रहेगा, जबकि दो दिन भगवान पद्मनाभ के लिए आरक्षित होंगे। तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट की स्थापना 1932 में हुई थी। तब से इस परंपरा को निभाया जा रहा है। साल में दो बार होने वाली आराट्टू शोभायात्रा के लिए एयरपोर्ट के परिचालन में बदलाव किया जाता है।



