आगरा (उत्तर प्रदेश)। आगरा जनपद की सदर तहसील स्थित ग्राम कुण्डौल, गांव मल्हैला विजय में सदियों पुराने सार्वजनिक श्मशान घाट की भूमि पर कथित अवैध कब्जे और फर्जी बैनामे का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को शिकायती प्रार्थना पत्र सौंपकर आरोप लगाया है कि भूमाफियाओं ने अधिकारियों की कथित मिलीभगत से श्मशान घाट की सरकारी भूमि का अवैध बैनामा कर निजी बिल्डर को बेच दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो गांव की सार्वजनिक संपत्ति पर स्थायी कब्जा हो जाएगा और भविष्य में अंतिम संस्कार जैसी मूलभूत व्यवस्था भी संकट में पड़ जाएगी।
ग्रामीणों के अनुसार ग्राम सभा मौजा कुण्डौल के गाटा संख्या 1964 (पूर्व गाटा संख्या 790) की लगभग 0.2800 हेक्टेयर भूमि वर्षों से मरघट और श्मशान घाट के रूप में उपयोग में रही है। गांव के लोग पीढ़ियों से इसी स्थान पर अपने परिजनों का अंतिम संस्कार करते आए हैं और राजस्व अभिलेखों में भी यह भूमि श्मशान एवं बंजर भूमि के रूप में दर्ज बताई गई है। आरोप है कि चकबंदी के दौरान कथित अनियमितताओं के जरिए इस भूमि को कृषि भूमि दर्शाने का प्रयास किया गया।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कंचन सिंह धाकरे, मुकेश गुप्ता और सुनील कुमार ने कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों और अधिकारियों की मिलीभगत से इस सार्वजनिक भूमि का बैनामा 20 फरवरी 2026 को मैसर्स शिव कृपा बिल्डर्स के पक्ष में करा दिया। ग्रामीणों का कहना है कि करोड़ों रुपये के व्यावसायिक लाभ के उद्देश्य से श्मशान घाट की भूमि पर कॉलोनी विकसित करने की तैयारी की जा रही है, जो जनहित और कानून दोनों के खिलाफ है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि 19 मार्च 2026 को बिल्डर द्वारा भूमि पर मिट्टी डलवाकर कब्जा करने की कोशिश की गई। जब गांव के लोगों ने विरोध किया तो उन्हें जान से मारने की धमकियां दी गईं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि पूरे गांव में भय का माहौल है और भूमाफियाओं के डर से लोग खुलकर विरोध करने से भी घबरा रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से गांव में पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराने और सार्वजनिक भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
प्रार्थना पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि रजिस्ट्री प्रक्रिया के दौरान संबंधित अधिकारियों ने राजस्व अभिलेखों का समुचित सत्यापन किए बिना कथित रूप से बैनामा पंजीकृत कर दिया। ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, अवैध बैनामा निरस्त किया जाए, राजस्व अभिलेखों में किसी भी प्रकार की दाखिल-खारिज पर तत्काल रोक लगाई जाए तथा दोषी अधिकारियों और संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से श्मशान घाट की भूमि की चारदीवारी कराकर उसे भूमाफियाओं के कब्जे से सुरक्षित कराने, आगरा विकास प्राधिकरण को इस भूमि पर किसी भी प्रकार का मानचित्र स्वीकृत न करने के निर्देश देने तथा जनहित में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनका कहना है कि यह केवल जमीन का विवाद नहीं, बल्कि गांव की आस्था, परंपरा और सार्वजनिक अधिकारों की रक्षा का प्रश्न है।



