शिवपुरी के सुभाषपुरा थाना क्षेत्र के मढ़ेवा गांव का मामला; एसपी से शिकायत कर आरोपियों की गिरफ्तारी और परिवार की सुरक्षा की मांग
शिवपुरी। सुभाषपुरा थाना क्षेत्र के ग्राम मढ़ेवा में जमीन विवाद को लेकर दो पक्षों के बीच मारपीट का मामला सामने आया है। सुजियापुरा निवासी पाल सिंह ने पुलिस अधीक्षक को शिकायत देकर आरोप लगाया है कि जमीन के विवाद को लेकर उनके बेटे हरविंदर सिंह समेत परिवार के लोगों पर लाठी, कुल्हाड़ी और फरसे से हमला किया गया। शिकायतकर्ता के अनुसार, घटना में पाल सिंह, उनके बेटे हरविंदर सिंह, समधी बलजीत सिंह और पुत्रवधू मंजीत कौर घायल हुए हैं।
पाल सिंह के मुताबिक, गंभीर चोटों के कारण उन्हें पहले सतनवाड़ा स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। वहां से मेडिकल कॉलेज शिवपुरी और बाद में ग्वालियर रेफर किए जाने की बात कही गई है।
खेत की ओर जा रहे बेटे को घेरने का आरोप
शिकायत के अनुसार घटना 1 मई 2026 की सुबह करीब 7 बजे की है। पाल सिंह का कहना है कि ग्राम मढ़ेवा में उनकी कृषि भूमि है और इसी जमीन को लेकर सुलमान गुर्जर और अन्य लोगों से लंबे समय से विवाद चल रहा है।
आरोप है कि उनका बेटा हरविंदर सिंह खेत की ओर जा रहा था। इसी दौरान रास्ते में सुलमान गुर्जर, गजराज गुर्जर, पंजाब गुर्जर, श्याम सिंह गुर्जर, रामहेत गुर्जर और रामरतन गुर्जर ने उसे घेर लिया। आरोप है कि विवाद के दौरान गाली-गलौज के बाद लाठी, कुल्हाड़ी और फरसे से हमला कर दिया गया।
हरविंदर को बचाने के लिए पाल सिंह और उनके समधी बलजीत सिंह मौके पर पहुंचे, लेकिन शिकायत के मुताबिक हमलावरों ने उनके साथ भी मारपीट की। बीच-बचाव करने पहुंचीं मंजीत कौर के साथ भी मारपीट किए जाने का आरोप है।
पिता-पुत्र के हाथ-पैर में फ्रैक्चर का दावा
पीड़ित परिवार के अनुसार, हमले में पाल सिंह के दोनों पैरों और पसली में फ्रैक्चर हुआ है। वहीं हरविंदर सिंह के दोनों पैरों और हाथ में फ्रैक्चर आने की बात कही गई है। बलजीत सिंह के पैर में भी फ्रैक्चर बताया गया है, जबकि मंजीत कौर को चोट लगने का आरोप है।
मंजीत कौर की ओर से दर्ज कराई गई प्रथम सूचना में भी सुलमान गुर्जर, गजराज गुर्जर, पंजाब गुर्जर और श्याम सिंह गुर्जर पर उनके पति हरविंदर सिंह और ससुर पाल सिंह के साथ लाठियों से मारपीट करने का आरोप लगाया गया है।
तीन लोगों के पास बंदूक होने का आरोप
हरविंदर सिंह ने आरोप लगाया कि रामरतन, श्याम सिंह और पंजाब सिंह के पास बंदूकें हैं और वे कथित तौर पर इन्हीं हथियारों के बल पर क्षेत्र में दबंगई दिखाते हैं। हरविंदर का कहना है कि हमले के दौरान हथियार दिखाकर परिवार को जान से मारने की धमकी भी दी गई।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पीड़ित परिवार ने पुलिस से मामले की निष्पक्ष जांच कर हथियारों की भी जांच कराने की मांग की है।
परिवार के अस्पताल में होने के दौरान जमीन पर जुताई का आरोप
शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि जमीन को बेचने के बाद उसकी नाप कराकर खरीदार को कब्जा सौंपना था। इसी बात को लेकर विवाद हुआ और कथित तौर पर हमला किया गया। परिवार का आरोप है कि जब घायल सदस्य इलाज के लिए अस्पतालों में थे, उसी दौरान उनकी कृषि भूमि पर कथित रूप से जुताई कर दी गई।
पाल सिंह का आरोप है कि जब उनका परिवार शिकायत करने के लिए थाने पहुंचा, उससे पहले ही दूसरे पक्ष के लोग थाने पहुंच गए और उनके खिलाफ शिकायत कर दी। पीड़ित पक्ष का कहना है कि पुलिस ने उनकी ओर से बताए गए सभी आरोपियों के नाम एफआईआर में दर्ज नहीं किए और घटना का पूरा विवरण भी दर्ज नहीं किया।
एफआईआर में धाराएं बढ़ाने और गिरफ्तारी की मांग
शिकायत के अनुसार, सुभाषपुरा थाने में एफआईआर क्रमांक 0069, दिनांक 1 मई 2026 को भारतीय न्याय संहिता की धारा 296, 115(2), 3(5) और 351(3) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि घटना की गंभीरता के बावजूद सभी आरोपियों के खिलाफ उचित धाराएं नहीं जोड़ी गईं और अभी तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
परिवार ने पुलिस अधीक्षक को दिए आवेदन में कहा है कि आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं और उनके भय के कारण वे अपनी कृषि भूमि पर जाने से डर रहे हैं। परिवार ने अपनी जान-माल की सुरक्षा के लिए पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है।
हरविंदर सिंह का कहना है कि हमले में उनके पिता पाल सिंह को गंभीर चोटें आईं और उनके हाथ-पैर में फ्रैक्चर हुआ। परिवार के अन्य सदस्य और मेहमान के रूप में आए बलजीत सिंह भी कथित हमले में घायल हुए। अब पीड़ित परिवार प्रशासन से निष्पक्ष जांच, न्याय और सुरक्षा की मांग कर रहा है।
‘भविष्य में कोई घटना हुई तो आरोपी जिम्मेदार होंगे’
पीड़ित परिवार ने एसपी को दिए आवेदन में आशंका जताई है कि आरोपियों की ओर से भविष्य में उनके या परिवार के किसी सदस्य के साथ कोई अप्रिय घटना की जा सकती है। परिवार ने मांग की है कि यदि भविष्य में उनके साथ कोई घटना होती है तो शिकायत में नामजद लोगों की भूमिका की जांच कर उन्हें जिम्मेदार माना जाए।



