बांदा। जिले के अतर्रा तहसील क्षेत्र के ग्राम साहपुर सानी में सड़क की बदहाल स्थिति ग्रामीणों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव और डेरा बस्ती को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाला करीब दो किलोमीटर लंबा कच्चा रास्ता बरसात के दिनों में कीचड़ और जलभराव से पूरी तरह खराब हो जाता है। इससे करीब 500 ग्रामीणों का आवागमन प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से सड़क का डामरीकरण कराने की मांग की है।
ग्रामीणों के मुताबिक साहपुर सानी की बस्ती को मुख्य सड़क से जोड़ने के लिए यही प्रमुख रास्ता है। लंबे समय से पक्की सड़क नहीं बनने के कारण बरसात में रास्ते पर जगह जगह पानी भर जाता है और पूरी सड़क कीचड़ में तब्दील हो जाती है। हालत यह हो जाती है कि पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। दोपहिया और अन्य वाहनों से निकलना भी जोखिम भरा रहता है।
ग्रामीणों ने बताया कि इस रास्ते की खराब हालत का सबसे अधिक असर स्कूली बच्चों पर पड़ रहा है। बरसात के दिनों में कीचड़ और पानी के कारण बच्चों को स्कूल आने जाने में परेशानी होती है। कई बार रास्ता इतना खराब हो जाता है कि बच्चों की पढ़ाई तक प्रभावित होने लगती है।
स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति में भी ग्रामीणों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों का आरोप है कि किसी व्यक्ति की तबीयत बिगड़ने पर उसे चारपाई या अन्य साधन से कीचड़ भरे रास्ते से मुख्य मार्ग तक पहुंचाना पड़ता है। इसके बाद ही वाहन मिल पाता है। गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने में भी रास्ते की बदहाली बड़ी बाधा बनती है।
ग्रामीणों का कहना है कि करीब 500 लोगों की आबादी वर्षों से इस समस्या से जूझ रही है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हुआ है। बरसात में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से जनहित को देखते हुए सड़क का जल्द से जल्द डामरीकरण कराने की मांग की है।
इस संबंध में ग्रामीणों ने जिलाधिकारी और क्षेत्रीय सांसद से भी शिकायत कर सड़क को पक्का कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि मुख्य मार्ग तक सड़क का निर्माण हो जाए तो बच्चों की पढ़ाई, मरीजों को अस्पताल पहुंचाने और किसानों मजदूरों के आवागमन में बड़ी राहत मिलेगी।
ग्रामीणों ने चेतावनी नहीं बल्कि उम्मीद जताते हुए कहा कि प्रशासन उनकी वर्षों पुरानी समस्या को गंभीरता से लेकर जल्द सड़क निर्माण की कार्रवाई करेगा। अब देखना यह है कि करीब 500 ग्रामीणों की परेशानी कब खत्म होती है और कच्चा रास्ता कब पक्की सड़क में तब्दील होता है।



