संभल। जिले के धनारी क्षेत्र के रहने वाले किसान यशवीर इन दिनों अपनी फसल को लेकर परेशान हैं। पीड़ित किसान का कहना है कि उन्होंने खेती में मेहनत और पैसा लगाया, लेकिन पांच दिन बीत जाने के बाद भी धान की फसल में बाल नहीं निकले हैं। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान की चिंता सता रही है। किसान के मुताबिक, इस समस्या के चलते उन्हें करीब 80 हजार रुपये का नुकसान हुआ है। परिवार की आजीविका खेती और मजदूरी पर निर्भर होने के कारण उनकी परेशानी और बढ़ गई है। अब पीड़ित किसान चाहता है कि उसकी समस्या प्रशासन तक पहुंचे और मामले की गंभीरता से जांच कर उसे उचित सहायता दिलाई जाए।
यशवीर के मुताबिक, उन्होंने धान की फसल तैयार करने के लिए मेहनत के साथ अपनी जमा पूंजी भी लगाई थी। उन्हें उम्मीद थी कि फसल अच्छी होगी और उससे परिवार का खर्च चलाने में मदद मिलेगी, लेकिन फसल में बाल नहीं निकलने के कारण उनकी उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। किसान का कहना है कि पांच दिन से वह इस समस्या को लेकर परेशान हैं, लेकिन अभी तक उन्हें कोई राहत नहीं मिली है। उनका दावा है कि इस स्थिति के कारण उन्हें लगभग 80 हजार रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है।
पीड़ित किसान ने बताया कि उन्होंने जिस दुकान से संबंधित सामान लिया था, उस दुकानदार का नाम राजवीर यादव बताया जा रहा है, जो बहजोई क्षेत्र के निवासी बताए गए हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी से यह स्पष्ट नहीं है कि किसान ने दुकान से कौन-सा कृषि उत्पाद खरीदा था और फसल में बाल नहीं निकलने का वास्तविक कारण क्या है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि यह पता चल सके कि समस्या बीज, खाद, दवा, मौसम, सिंचाई या खेती से जुड़े किसी अन्य कारण से हुई है।
यशवीर के अनुसार, उनके पास नौ बीघा जमीन भी है, जिसे वह पक्की जमीन बता रहे हैं। खेती ही उनके परिवार की आजीविका का प्रमुख साधन है और परिवार का खर्च खेती के साथ मजदूरी करके चलता है। ऐसे में फसल खराब होने या अपेक्षित उत्पादन नहीं मिलने की आशंका उनके लिए बड़ा आर्थिक संकट बन गई है। किसान का कहना है कि यदि फसल से उचित पैदावार नहीं मिलती है, तो परिवार के सामने रोजमर्रा के खर्च पूरे करने की चुनौती खड़ी हो सकती है।
पीड़ित किसान यशवीर चाहते हैं कि उनकी शिकायत को संबंधित कृषि विभाग और प्रशासन तक पहुंचाया जाए। उनका कहना है कि मामले की गंभीरता से जांच कराई जाए और फसल में बाल नहीं निकलने के कारणों का पता लगाया जाए। यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही या संबंधित उत्पाद में कमी सामने आती है, तो नियमानुसार जिम्मेदारी तय की जाए। किसान ने अपने कथित 80 हजार रुपये के नुकसान को देखते हुए उचित सहायता और नुकसान की भरपाई की मांग की है।
इस मामले में कृषि विभाग की ओर से फसल का निरीक्षण और आवश्यक जांच महत्वपूर्ण हो सकती है। खेत की स्थिति, फसल की अवस्था, इस्तेमाल किए गए बीज और कृषि उत्पादों की जानकारी के आधार पर ही नुकसान के कारणों का पता लगाया जा सकता है। फिलहाल, किसान की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित दुकानदार का पक्ष भी सामने आना बाकी है।
अब किसान यशवीर को उम्मीद है कि उनकी आवाज प्रशासन तक पहुंचेगी और उनकी समस्या पर समय रहते ध्यान दिया जाएगा। परिवार की आजीविका खेती और मजदूरी पर निर्भर होने के कारण वह चाहते हैं कि मामले में निष्पक्ष जांच हो तथा पात्रता और जांच के निष्कर्षों के आधार पर उन्हें उचित राहत मिल सके।



