सैटेलाइट कम्युनिकेशन सर्विस के रेगुलेटरी फ्रेमवर्क को भेदभावपूर्ण बताए जाने वाले सोशल मीडिया दावों को संचार मंत्रालय ने खारिज किया है। मंत्रालय ने कहा कि तीन वैश्विक कंपनियों को NGSO आधारित GMPCS सेवाओं के लिए लाइसेंस दिए गए हैं।
सैटेलाइट कम्युनिकेशन सर्विस के लिए भारत के रेगुलेटरी फ्रेमवर्क को लेकर सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावों को संचार मंत्रालय ने खारिज कर दिया है। मंत्रालय ने कहा कि देश में सभी टेलीकम्युनिकेशन सर्विस, जिनमें सैटेलाइट कम्युनिकेशन सर्विस भी शामिल हैं, के लिए निष्पक्ष और गैर-भेदभावपूर्ण ऑथराइजेशन फ्रेमवर्क तैयार किया गया है।
मंत्रालय के मुताबिक, भारत में सैटेलाइट कम्युनिकेशन सर्विस उपलब्ध कराने की दिशा में नॉन-जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट ऑर्बिट (NGSO) आधारित ग्लोबल मोबाइल पर्सनल कम्युनिकेशन बाय सैटेलाइट (GMPCS) सर्विस देने वाली तीन वैश्विक कंपनियों को टेलीकॉम लाइसेंस दिए गए हैं।
तीनों कंपनियों को सुरक्षा शर्तों का पालन जरूरी
संचार मंत्रालय ने बताया कि लाइसेंस की शर्तों के तहत प्रत्येक लाइसेंसधारी कंपनी के लिए सुरक्षा संबंधी सभी आवश्यक शर्तों का पालन करना अनिवार्य है। इन सुरक्षा प्रावधानों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सैटेलाइट के जरिए उपलब्ध कराई जाने वाली कम्युनिकेशन सर्विस में यूजर्स और उनके डेटा की सुरक्षा के लिए जरूरी मानकों का पालन हो।
मंत्रालय के अनुसार, लाइसेंसधारी कंपनियों के लिए सुरक्षा मूल्यांकन की प्रक्रिया फिलहाल जारी है। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित कंपनी स्पेक्ट्रम आवंटन के अगले चरण में आगे बढ़ सकेगी।
तीनों कंपनियां लगभग एक ही चरण में
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि मौजूदा स्थिति में तीनों लाइसेंसधारी कंपनियां मोटे तौर पर एक ही रेगुलेटरी स्टेज पर हैं। ऐसे में किसी एक कंपनी को दूसरे की तुलना में अनुचित लाभ देने या नियमों को अलग-अलग तरीके से लागू करने का सवाल नहीं उठता है।
बेबुनियाद और गलतफहमी वाले बयान
मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर किए जा रहे उन दावों को बेबुनियाद और गलतफहमी पर आधारित बताया है, जिनमें कहा जा रहा है कि भारत का सैटेलाइट कम्युनिकेशन रेगुलेटरी फ्रेमवर्क भेदभावपूर्ण तरीके से लागू किया जा रहा है। इस पर सरकार का कहना है कि सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेवाओं को लेकर लाइसेंसिंग, सुरक्षा मूल्यांकन और स्पेक्ट्रम आवंटन की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत की जा रही है। सभी लाइसेंसधारी कंपनियों के लिए समान नियामकीय प्रक्रिया लागू है।
एलन मस्क ने उठाए थे सवाल
बता दें कि भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करने की कोशिशों के बीच एलन मस्क ने बड़ा दावा किया है। स्टारलिंक की भारत में योजनाओं से जुड़े एक पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए मस्क ने आरोप लगाया कि कुछ बड़े बिजनेस मैन कंपनी को भारत में काम करने से रोक रहे हैं ताकि उनका एकाधिकार कायम रहे। उन्होंने इसे भारतीय जनता के खिलाफ अपराध तक करार दिया।



