Saturday, September 12, 2026

‘ये तो ब्राजील-दक्षिण अफ्रीका से भी बेहतर है’, भारत में ऐसा क्या मिला कि खुश हो गए जर्मन पत्रकार

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18वें BRICS शिखर सम्मेलन के लिए भारत पहुंचे जर्मन मीडिया डेलिगेट बेन ने आयोजन और मीडिया इंतजामों की जमकर तारीफ की। उन्होंने भारत को उम्मीद से बेहतर बताते हुए कहा कि ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका में BRICS सम्मेलनों के अनुभव के बावजूद भारत का मीडिया किट सबसे अच्छा है।
जर्मन पत्रकार बेन बोले, भारत उम्मीद से कहीं बेहतर, BRICS की व्यवस्थाएं बिल्कुल शानदार हैं।
BRICS Bazaar में बेलारूस, ब्राजील, कजाकिस्तान और ईरान समेत 18 देशों की कलाएं प्रदर्शित हैं।
भारत की अध्यक्षता में BRICS Summit के साथ समूह के 20 साल भी पूरे हो रहे हैं।
नई दिल्ली: 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने पहुंचे जर्मन मीडिया डेलिगेट बेन ने भारत में सम्मेलन की तैयारियों और मीडिया के लिए किए गए इंतजामों की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि ‘भारत उम्मीद से कहीं बेहतर है’ और अब तक सम्मेलन का आयोजन पूरी तरह शानदार रहा है। बेन ने मीडिया किट में मिले सामान की भी तारीफ की और कहा कि ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका में BRICS सम्मेलन में हिस्सा लेने के बावजूद उन्हें भारत का मीडिया बैग सबसे बेहतर लगा।

‘भारत मेरी उम्मीद से कहीं बेहतर है’
भारत में BRICS को लेकर किए गए इंतजामों की तारीफ करते हुए बेन ने कहा,

‘मैं बहुत हैरान हूं। भारत मेरी उम्मीद से कहीं बेहतर है। अब तक शिखर सम्मेलन का आयोजन बिल्कुल शानदार है। हमें मीडिया उपकरण यानी मीडिया किट मिला है। मैं ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका में BRICS सम्मेलन में जा चुका हूं, लेकिन यह सबसे अच्छा बैग है।’

बेन ने मीडिया किट में मिले सामान का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें वीगन सुपर फूड, कॉफी और हल्का मग दिया गया है। इसके अलावा एक खूबसूरत स्कार्फ, बोतल और कुछ अन्य सुपर फूड भी शामिल हैं।
BRICS समिट के साथ संस्कृति की भी झलक
12 और 13 सितंबर को भारत मंडपम में 18वां BRICS शिखर सम्मेलन आयोजित हो रहा है। इसके साथ ही दिल्ली में BRICS देशों और साझेदार देशों की संस्कृति और हस्तशिल्प को दिखाने वाला BRICS Bazaar भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यह हेरिटेज बाजार नेशनल क्राफ्ट्स म्यूजियम एंड हस्तकला अकादमी के परिसर में लगाया गया है, जो भारत मंडपम के पास स्थित है। यहां BRICS सदस्य और साझेदार देशों की पारंपरिक कला, हस्तशिल्प, हथकरघा, कपड़े और कलाकृतियां प्रदर्शित की जा रही हैं। BRICS 2026 की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक,

‘ब्रिक्स बाजार BRICS समुदाय की विविध संस्कृतियों और रचनात्मक भावना का उत्सव है। इसमें सदस्य और साझेदार देशों के कारीगर, डिजाइनर और रचनात्मक उद्यम एक साथ आए हैं। बाजार में पारंपरिक हस्तशिल्प, हथकरघा, कपड़े, कलाकृतियां और दूसरी चीजें मौजूद हैं।’

यह बाजार 10 सितंबर को शुरू हुआ और 15 सितंबर तक चलेगा। बता दें कि BRICS समिट 2026 की वजह से आज दिल्ली में कई रास्तों पर ट्रैफिक डायवर्ट किया गया है।

BRICS समिट में सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम
ब्रिक्स समिट शुरू होने के साथ ही BRICS बाजार और इसके आसपास के इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। बाजार स्थल पर सुरक्षा का व्यापक घेरा बनाया गया है। BRICS Bazaar में अलग-अलग देशों की अनोखी पारंपरिक कलाएं देखने को मिल रही हैं। बेलारूस की विलो वीविंग यानी लचीली विलो की टहनियों से बुनाई भी इनमें शामिल है। बेलारूस के मोलोदचेनों की प्रसिद्ध विलो बुनकर लाना स्लास्त्सियोन ‘वर्बाच्का’ लोक शिल्प समूह का नेतृत्व करती हैं। BRICS की वेबसाइट के मुताबिक, उन्हें बेलारूस गणराज्य की ‘पीपुल्स मास्टर’ के रूप में मान्यता मिली है।

ब्राजील की मिट्टी में हजारों साल पुरानी परंपरा
बाजार में ब्राजील की क्ले आर्ट यानी मिट्टी की कला भी प्रदर्शित की गई है। ब्राजील के गोयास की सिरेमिक कलाकार और मूर्तिकार क्लेजियानिया रिबेरो डी लीमा पाइवा को भी यहां जगह मिली है। BRICS की वेबसाइट के मुताबिक, ब्राजील की मिट्टी से बनी कला अमेरिका महाद्वीप की सबसे पुरानी जीवित परंपराओं में से एक है। वहां के मूल निवासियों ने नदी किनारे की मिट्टी से बर्तन और दूसरे सामान बनाए। बाद में पुर्तगाली और अफ्रीकी तकनीकों के साथ इन परंपराओं का मेल हुआ और एक खास ब्राजीलियाई कला विकसित हुई। इस कला में नदी किनारे और पहाड़ियों से हाथ से निकाली गई मिट्टी का इस्तेमाल होता है।

कजाकिस्तान और ईरान की कला भी शामिल
BRICS बाजार में कजाकिस्तान के कलाकार-ज्वेलर सेरिक रिसबेकोव की कला भी प्रदर्शित की गई है। वह चांदी के गहनों में गर्म एनामेल, प्राकृतिक पत्थरों और पारंपरिक कजाख प्रभावों को आधुनिक डिजाइन के साथ मिलाते हैं। ईरान की कलाकार नादिया करीमी भी इस बाजार का हिस्सा हैं। उनका काम बलूची कढ़ाई की पारंपरिक कला को बचाने और उसे आगे बढ़ाने पर केंद्रित है। BRICS की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक, बलूची कढ़ाई बलूच महिलाओं की पहचान और विरासत से गहराई से जुड़ी है। यह कला पीढ़ियों से मां से बेटी तक पहुंचती रही है।

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