Thursday, November 5, 2026

पन्ना की धरती ने फिर उगला अनमोल रत्न, मिला 27.29 कैरेट का बेशकीमती हीरा

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पन्ना की धरती ने एक बार फिर से हीरा उगला है, जहां एनएमडीसी की खदान में 27.29 कैरेट का हीरा मिला है। इसे पन्ना के खनन इतिहास की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
‘हीरों की धरती’ पन्ना में एक और बेशकीमती रत्न मिला। मध्य प्रदेश में NMDC की खदान से 27.29 कैरेट का बेहतरीन क्वालिटी वाला हीरा मिला है। 15 सितंबर 2026 को मझगवां खदान में हुई यह खोज जिले के माइनिंग इतिहास में एक अहम पड़ाव मानी जा रही है। मार्च 2024 में मशीनों से माइनिंग का काम फिर से शुरू होने के बाद से यह सबसे बड़ा और बेहतरीन क्वालिटी वाला हीरा है।
NMDC और पन्ना के लिए बड़ी उपलब्धि
27.29 कैरेट का यह हीरा 2010 में मिले 34.37 कैरेट के हीरे के बाद पन्ना से NMDC को मिला दूसरा सबसे बड़ा हीरा है। साथ ही यह जुलाई 2026 में मिले 13.16 कैरेट के हीरे से भी बड़ा है। इसके रंग, चमक, कैरेट वज़न और खास ‘S-शेप’ के आधार पर शुरुआती अनुमान में इसकी कीमत 1.5 करोड़ से 2.5 करोड़ के बीच आंकी गई है। हालांकि, फाइनल ग्रेडिंग और नीलामी से पहले कुछ अनुमान इसे 1.5 से 2 करोड़ के आसपास बता रहे हैं।

रत्न विशेषज्ञों का फिर बढ़ा उत्साह
NMDC प्रोजेक्ट मैनेजमेंट ने इस कामयाबी का श्रेय आधुनिक तकनीकी जानकारी, मशीनों से माइनिंग की क्षमता और पूरी टीम की लगातार कोशिशों को दिया है। उनका कहना है कि इससे यह बात फिर साबित होती है कि पन्ना बेहतरीन हीरों के लिए दुनिया भर में क्यों मशहूर है। इस खोज ने स्थानीय माइनर्स, व्यापारियों और रत्न विशेषज्ञों में उत्साह बढ़ा दिया है। उन्हें उम्मीद है कि आने वाली नीलामियों में पन्ना के हीरों के लिए लोगों की दिलचस्पी और बढ़ेगी।

पन्ना का गौरव: बड़े हीरों की विरासत
पन्ना जिला अपनी बेहतरीन क्वालिटी वाले हीरों के लिए दुनिया भर में मशहूर है। यहां कम गहराई वाली खुदाई से छोटे पत्थर से लेकर NMDC के मशीनीकृत प्रोजेक्ट से बड़े रत्न तक मिलते रहे हैं। हाल ही में इस इलाके के हीरों को ‘ज्योग्राफिकल इंडिकेशन’ (GI) टैग मिला है, जिससे भारत के मुख्य हीरा-उत्पादक क्षेत्र के तौर पर पन्ना की पहचान और मजबूत हुई है। इस जिले के लिए 27.29 कैरेट का हीरा सिर्फ एक व्यावसायिक कामयाबी नहीं है। यह सदियों पुरानी हीरा खोजने की कहानी के जारी रहने का प्रतीक है, जिसे अब आधुनिक माइनिंग टेक्नोलॉजी और वैज्ञानिक प्रोसेसिंग का सहारा मिला है।

बारिश के बाद रुंज नदी पर हीरों की खोज की होड़
जहां NMDC की खदान चर्चा में रहती है। वहीं मॉनसून के बाद रुंज नदी के किनारे भी हीरों की खोज की एक होड़ शुरू हो गई है। पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, बांदा (उत्तर प्रदेश) और आस-पास के जिलों से सैकड़ों लोग नदी के किनारे जमा हो गए हैं और बारिश के साथ बहकर आए हीरों की तलाश में रेत और गाद को छान रहे हैं। कुछ लोग नदी के पास अस्थायी टेंट लगाकर वहां डेरा जमाए हुए हैं। उन्हें उम्मीद है कि शायद उन्हें कोई छोटा सा पत्थर ही मिल जाए।

खदान पर पहुंची वन विभाग
वन विभाग की टीमों ने इस जगह का दौरा किया है। उन्होंने सुरक्षा और कानूनी कारणों का हवाला देते हुए लोगों को वहां से जाने और भीड़ हटाने के लिए कहा है, लेकिन कई लोग फिर भी लौट आते हैं। उन्हें यकीन है कि नदी की तलहटी में अभी भी छोटे हीरे मिल सकते हैं। स्थानीय लोग बताते हैं कि वे हर मॉनसून के बाद ‘रुंज’ आते रहे हैं। ज्यादातर लोगों को या तो बहुत छोटे पत्थर मिलते हैं या कुछ भी नहीं, फिर भी कुछ बड़ा मिलने का सपना परिवारों को बार-बार नदी के किनारे खींच लाता है।

यह खोज क्यों अहम है?
NMDC के लिए 27.29 कैरेट का हीरा दक्षिण एशिया में उसकी एकमात्र मशीनीकृत हीरा खदान के लिए एक बड़ी कामयाबी है। यह कामयाबी 2026 की शुरुआत में मिले 13.16 कैरेट के हीरे के ठीक बाद मिली है। जैसे-जैसे 27.29 कैरेट का यह हीरा ग्रेडिंग और नीलामी की प्रक्रिया की ओर बढ़ रहा है। भारत की ‘डायमंड कैपिटल’ के तौर पर पन्ना की पहचान और भी चमकने वाली है, चाहे वह NMDC की खदान हो या रुंज नदी की रेत।

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