सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच जंग लगातार जारी है। ईरान के समर्थन वाले सशस्त्र समूह हूती ने सऊदी अरब पर कई हमले किए हैं, जिनमें राजधानी रियाद और ईस्ट-वेस्ट क्रूड ऑयल पाइपलाइन भी शामिल है।
मिडिल ईस्ट में एक बार फिर से जंग शुरू हो चुकी है। सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोही लगातार एक दूसरे के ठिकानों पर हमले को अंजाम दे रहे हैं। हूती विद्रोही सऊदी अरब की इंफ्रास्ट्रक्चर और लाल सागर में उसके जहाजों को निशाना बना रहे हैं। हूतियों ने बाब अल-मंदेब स्ट्रेट में कई द्वीपों पर कब्जा भी कर लिया है। इन सब के बीच एक बड़ा सवाल ये खड़ा हो रहा है कि अमेरिका सऊदी अरब की मदद के लिए आगे क्यों नहीं आ रहा है? अब अमेरिकी मीडिया ने इस बारे में एक हैरान करने वाला खुलासा किया है। जानकारी के अनुसार, अमेरिकी सेना ने हूती विद्रोहियों को निशाना बनाने के लिए टारगेट तय कर लिए थे लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आखिरी समय में यू-टर्न ले लिया और हमले से पीछे हट गए।
आखिरी समय में पलट गए ट्रंप
द न्यूयॉर्क टाइम्स की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के निवेदन के बाद अमेरिका की सेना ने यमन में हूती विद्रोहियों पर हमला करने के लिए ठिकाने और लक्ष्य तय कर लिए थे। हालांकि, आखिरी समय में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का मन बदल गया और हूतियों पर होने वाले इन हमलों को रोक दिया गया।
रिपोर्ट्स के अनुसार, 16 सितंबर को ट्रंप ने अपने सलाहकारों से कहा था कि वह हूतियों पर हमला करने के पक्ष में नहीं हैं। लेकिन इसके बाद ट्रंप और सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के बीच बातचीत हुई थी। बातचीत के बाद ट्रंप ने हूतियों पर हमले का आदेश जारी कर दिया। ऐसे में पेंटागन ने हमले के लिए टारगेट्स की पहचान भी की और अमेरिकी सेना हमले के लिए तैयार थी। हालांकि, ट्रंप ने आखिरी समय में एक बार फिर से अपना फैसला बदल दिया और हूतियों के खिलाफ प्रस्तावित हमले को रोक दिया।
नया मोर्चा नहीं खोलना चाहता अमेरिका
आपको बता दें कि हाल ही में अमेरिका ने सऊदी अरब को 24.3 अरब अमेरिकी डॉलर के हथियार बेचने की मंजूरी दी है। इनमें 48 F-35 लड़ाकू विमान और संबंधित उपकरण शामिल हैं। हालांकि, अमेरिका फिलहाल सऊदी और हूतियों की लड़ाई से दूरी बनाता हुआ नजर आ रहा है। अमेरिका के शीर्ष अधिकारियों ने हाल के दिनों में संकेत दिया है कि वे हूतियों के खिलाफ मोर्चा खोलने के पक्ष में नहीं थे, क्योंकि वे पहले से ही ईरानियों से निपटने में लगे हुए हैं। हालांकि, अमेरिका ने सऊदी को सुरक्षा के लिए ट्रेनिंग और अन्य मदद उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता जताई है।



