Wednesday, November 4, 2026

दिल्ली सड़क हादसे में बिहार के पिंकेश की मौत पर गंभीर आरोप, परिजनों का दावा- वाहन मालिक और पुलिस की मिलीभगत से डॉक्टरों पर नेचुरल डेथ की रिपोर्ट बनाने का दबाव; निष्पक्ष जांच और न्याय की गुहार

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ड्यूटी के दौरान सड़क हादसे में घायल हुआ था युवक, करीब 10 दिन अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझने के बाद तोड़ा दम; पत्नी और एक साल के मासूम बच्चे के सामने रोजी-रोटी का संकट

दिल्ली। राजधानी दिल्ली में सड़क हादसे में बिहार के मुंगेर जिले के रहने वाले पिंकेश की मौत का मामला अब गंभीर विवाद का रूप लेता जा रहा है। मृतक के परिजनों ने वाहन मालिक के साथ-साथ पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। परिवार का आरोप है कि पिंकेश की मौत सड़क दुर्घटना में लगी गंभीर चोटों के कारण हुई, लेकिन उसकी मृत्यु को प्राकृतिक बताने वाली रिपोर्ट तैयार कराए जाने का प्रयास किया गया। परिजनों ने आरोप लगाया है कि वाहन मालिक और कुछ पुलिसकर्मियों ने आपस में मिलीभगत कर डॉक्टरों से नेचुरल डेथ यानी प्राकृतिक मृत्यु की रिपोर्ट तैयार करने के लिए कहा। परिवार का दावा है कि दुर्घटना में घायल होने के बाद अस्पताल में भर्ती पिंकेश की मौत को प्राकृतिक मृत्यु बताना सच्चाई छिपाने की कोशिश है। हालांकि, पुलिस, वाहन मालिक और अस्पताल के डॉक्टरों की कथित मिलीभगत के इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। परिवार अब पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है।

जानकारी के अनुसार, पिंकेश बिहार के मुंगेर जिले का रहने वाला था। वह करीब एक साल से शारदा गुप्ता के यहां ड्राइवर के रूप में काम कर रहा था। इसके बदले उसे हर महीने 25 हजार रुपये वेतन मिलता था। परिवार के मुताबिक, 22 तारीख को पिंकेश मालिक की गाड़ी लेकर करोल बाग की तरफ सामान पहुंचाने गया था। सामान छोड़कर वापस लौटते समय झंडेवाला रोड पर उसकी गाड़ी का एक्सीडेंट हो गया। हादसे में उसके सिर में गंभीर चोट आई। दुर्घटना के बाद स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी और घायल पिंकेश को सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया।

परिजनों का कहना है कि पिंकेश अपने मालिक के काम से गाड़ी लेकर निकला था। इसलिए दुर्घटना के बाद वाहन मालिक को उसकी मदद करनी चाहिए थी और इलाज की जिम्मेदारी उठानी चाहिए थी। परिवार का आरोप है कि हादसे की जानकारी मिलने पर मालिक अस्पताल पहुंचा, लेकिन उसने घायल कर्मचारी के इलाज का खर्च उठाने से इनकार कर दिया। बताया गया कि वह दुर्घटनास्थल से गाड़ी हटवाने के बाद वहां से चला गया था। बाद में पुलिस का फोन आने पर दोबारा मौके पर पहुंचा।

इसी बीच पिंकेश के भतीजे के माध्यम से मनीष पासवान को दुर्घटना की जानकारी मिली। मनीष जब अस्पताल पहुंचे तो शाम के करीब चार बज चुके थे। उन्होंने वाहन मालिक से कहा कि पिंकेश पिछले एक साल से आपके यहां काम कर रहा था और काम के दौरान ही हादसे का शिकार हुआ है। ऐसे में उसके इलाज की जिम्मेदारी उठाकर परिवार की मदद की जानी चाहिए। लेकिन परिजनों का आरोप है कि मालिक ने इलाज कराने से इनकार कर दिया और परिवार को अपने स्तर पर व्यवस्था करने के लिए कह दिया।

करीब दस दिन जिंदगी और मौत से लड़ता रहा पिंकेश

हादसे में पिंकेश के सिर में गंभीर चोट आई थी। उसकी हालत इतनी नाजुक थी कि उसे अस्पताल के आईसीयू में भर्ती करना पड़ा। परिवार के मुताबिक, करीब दस दिनों तक अस्पताल में उसका इलाज चलता रहा। इस दौरान परिजनों को उम्मीद थी कि वह ठीक होकर अपने घर लौट आएगा। उसकी मां बिहार से दिल्ली पहुंचकर अस्पताल में बेटे की देखभाल कर रही थीं। परिवार के लोग लगातार उसकी सलामती की दुआ कर रहे थे, लेकिन 2 तारीख को पिंकेश की मौत हो गई।

परिजनों के अनुसार, जिस समय उसकी मां दवा लेने के लिए अस्पताल से बाहर गई थीं, उसी दौरान कुछ ही मिनटों के भीतर डॉक्टरों और नर्सों ने पिंकेश की मौत की सूचना दे दी। इस खबर से परिवार पूरी तरह टूट गया। मां ने अपना बेटा खो दिया और पत्नी के सिर से जीवन का सहारा उठ गया। एक साल का मासूम बच्चा पिता के साये से वंचित हो गया।

नेचुरल डेथ की रिपोर्ट पर परिवार का गंभीर आरोप, पुलिस और मालिक की मिलीभगत का दावा

पिंकेश की मौत के बाद अब सबसे गंभीर विवाद उसकी मेडिकल रिपोर्ट को लेकर सामने आया है। परिजनों का कहना है कि अस्पताल की रिपोर्ट में मौत का कारण नेचुरल डेथ यानी प्राकृतिक मृत्यु बताया गया है। परिवार इस रिपोर्ट पर सवाल उठा रहा है। उनका कहना है कि पिंकेश किसी सामान्य बीमारी के इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती नहीं हुआ था, बल्कि वह सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुआ था। उसके सिर में गंभीर चोट आई थी और दुर्घटना के बाद ही उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

परिजनों ने आरोप लगाया है कि वाहन मालिक और पुलिसकर्मियों ने आपस में मिलकर डॉक्टरों से ऐसी रिपोर्ट तैयार करने के लिए कहा, जिसमें पिंकेश की मौत को प्राकृतिक मृत्यु बताया जाए। परिवार का दावा है कि पुलिस के कुछ लोग भी वाहन मालिक के साथ मिले हुए हैं और मामले को दुर्घटना के रूप में दर्ज कराने के बजाय मौत की वास्तविक परिस्थितियों को छिपाने का प्रयास किया जा रहा है।

परिवार का सीधा सवाल है कि जब पिंकेश सड़क हादसे में घायल हुआ, उसके सिर में गंभीर चोट आई और करीब दस दिनों तक अस्पताल में उसका इलाज चला, तो उसकी मौत को प्राकृतिक मृत्यु कैसे बताया जा सकता है? परिजनों का कहना है कि यदि रिपोर्ट में वास्तविक कारण दर्ज नहीं किया गया है, तो इसकी जांच होनी चाहिए। परिवार चाहता है कि डॉक्टरों से कथित तौर पर रिपोर्ट बदलने के लिए कहे जाने के आरोपों की भी जांच की जाए और यह पता लगाया जाए कि मृत्यु के कारण को लेकर मेडिकल दस्तावेजों में क्या दर्ज किया गया है।

परिवार ने पुलिस की भूमिका पर भी उठाए सवाल

मृतक के घरवालों का आरोप है कि जिस मामले में पुलिस को निष्पक्ष कार्रवाई करनी चाहिए थी, उसी मामले में कुछ पुलिसकर्मियों की भूमिका संदिग्ध है। परिवार का दावा है कि पुलिस और वाहन मालिक के बीच मिलीभगत के कारण उन्हें न्याय मिलने में परेशानी हो रही है। परिजनों का कहना है कि दुर्घटना के बाद से ही उन्हें उचित सहयोग नहीं मिला और अब मौत की रिपोर्ट को लेकर भी गंभीर संदेह पैदा हो गया है।

परिवार की मांग है कि इस मामले की जांच स्थानीय स्तर पर ही सीमित न रखी जाए, बल्कि किसी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी या स्वतंत्र जांच एजेंसी से कराई जाए। जांच में दुर्घटना से जुड़े पुलिस रिकॉर्ड, अस्पताल में भर्ती होने के दस्तावेज, आईसीयू का इलाज, डॉक्टरों की रिपोर्ट, मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य मेडिकल रिकॉर्ड की जांच की जाए। यदि किसी ने डॉक्टरों पर गलत रिपोर्ट तैयार करने का दबाव बनाया है, तो उसकी भी जांच कर संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।

पत्नी और एक साल के बच्चे का भविष्य अंधकार में

पिंकेश की मौत से परिवार के सामने आर्थिक संकट भी खड़ा हो गया है। वह हर महीने 25 हजार रुपये कमाता था और उसी कमाई से परिवार का खर्च चलता था। उसके परिवार में पत्नी और करीब एक साल का मासूम बच्चा है। इसके अलावा माता-पिता भी हैं, जिनकी जिम्मेदारी भी पिंकेश पर थी। अब परिवार के सामने बच्चे की परवरिश, पत्नी का जीवनयापन और माता-पिता की देखभाल का बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।

परिजनों का कहना है कि पिंकेश की मौत ने परिवार की खुशियां छीन ली हैं। एक तरफ घर का कमाने वाला सदस्य चला गया, वहीं दूसरी तरफ परिवार को न्याय के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। पत्नी अपने छोटे बच्चे के भविष्य को लेकर चिंतित है। परिवार का कहना है कि जिस युवक ने अपनी मेहनत से घर चलाया, उसकी मौत के बाद उसके परिवार को अकेला नहीं छोड़ा जाना चाहिए।

परिजनों की मांग- निष्पक्ष जांच हो, मेडिकल रिपोर्ट की समीक्षा हो और दोषियों पर कार्रवाई हो

मनीष पासवान और मृतक के परिजनों ने प्रशासन से कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं। उनकी मांग है कि पिंकेश की मौत के वास्तविक कारणों की स्वतंत्र मेडिकल जांच कराई जाए। अस्पताल की रिपोर्ट और इलाज से संबंधित सभी दस्तावेजों की विशेषज्ञ डॉक्टरों से समीक्षा कराई जाए। वाहन मालिक की भूमिका और दुर्घटना के बाद इलाज में सहयोग नहीं करने के आरोपों की जांच हो। इसके साथ ही पुलिसकर्मियों और वाहन मालिक की कथित मिलीभगत तथा डॉक्टरों पर रिपोर्ट को प्राकृतिक मृत्यु बताने के लिए दबाव बनाने के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच की जाए।

परिजनों ने यह भी मांग की है कि यदि जांच में किसी पुलिसकर्मी, वाहन मालिक या अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। परिवार को उचित मुआवजा और आर्थिक सहायता दिलाई जाए, ताकि पिंकेश की पत्नी, एक साल के मासूम बच्चे और माता-पिता का जीवन आगे चल सके।

अब इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए पिंकेश की मौत का वास्तविक कारण क्या था? अस्पताल की रिपोर्ट में प्राकृतिक मृत्यु दर्ज किए जाने का आधार क्या है? क्या किसी ने डॉक्टरों पर रिपोर्ट तैयार करने के लिए दबाव बनाया था? क्या दुर्घटना के बाद वाहन मालिक ने अपनी जिम्मेदारी निभाई? इन सभी सवालों का जवाब निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आ सकता है।

पिंकेश के परिजनों का कहना है कि उन्हें किसी से बदला नहीं चाहिए, बल्कि अपने बेटे और परिवार के कमाने वाले सदस्य की मौत का सच सामने चाहिए। उनकी मांग है कि मामले को दबाया न जाए और किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति को बचाने की कोशिश न हो। परिवार प्रशासन से न्याय की गुहार लगा रहा है, ताकि पिंकेश की मौत की सच्चाई सामने आए और उसकी पत्नी तथा मासूम बच्चे को न्याय के साथ आर्थिक सहारा भी मिल सके।

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