Wednesday, September 23, 2026

मुआवजा राशि में हेराफेरी का आरोप, 41.18 लाख रुपये के भुगतान को लेकर कोर्ट में परिवाद

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पलामू। एनएच-98 परियोजना के लिए अधिग्रहित जमीन के मुआवजे की करीब 41.18 लाख रुपये की राशि के भुगतान को लेकर विवाद सामने आया है। हरिहरगंज थाना क्षेत्र के ग्राम भांवर निवासी उमेश यादव ने डालटनगंज न्यायालय में परिवाद दाखिल कर लालबिहारी यादव, युगेश्वर प्रसाद यादव और रामदेव यादव को विरोधी पक्ष बताते हुए जमीन के कागजात में कथित हेराफेरी, फर्जी सहमति पत्र तैयार कराने तथा अन्य रैयतों के हिस्से की मुआवजा राशि एक खाते में प्राप्त किए जाने का आरोप लगाया है।

परिवादी उमेश यादव के अनुसार, विवादित जमीन में उनके पूर्वज स्वर्गीय रामदास यादव का भी हिस्सा बताया जाता है। स्वर्गीय रामदास यादव अब इस दुनिया में नहीं हैं और उमेश यादव उनके वंशज के रूप में इस मामले में अपने पारिवारिक हिस्से और उससे संबंधित मुआवजा राशि के अधिकार को लेकर न्यायालय की शरण में पहुंचे हैं। परिवाद में उमेश यादव ने आरोप लगाया है कि उनके पूर्वज के हिस्से समेत अन्य रैयतों के अधिकार वाली जमीन के मुआवजे का पूरा भुगतान कथित तौर पर एक ही व्यक्ति के बैंक खाते में करा दिया गया।

परिवाद के अनुसार, मौजा करमा कला, अंचल छतरपुर में एनएच-98 सतगांवा से सिलदाग फोरलेन निर्माण परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहित की गई थी। इस संबंध में भू-अर्जन वाद संख्या 08/2017-18 दर्ज है। भू-अर्जन शाखा से संबंधित दस्तावेजों में एक एवार्ड के तहत कुल 41 लाख 18 हजार 417 रुपये की मुआवजा राशि दर्शाई गई है।

परिवादी का आरोप है कि उक्त जमीन में कई रैयतों का हिस्सा होने के बावजूद उनकी वास्तविक सहमति और अधिकारों के विपरीत पूरी मुआवजा राशि युगेश्वर प्रसाद यादव के बैंक ऑफ बड़ौदा, छतरपुर स्थित खाते में प्राप्त कर ली गई। आरोप है कि इस प्रक्रिया में अन्य रैयतों की सहमति से संबंधित दस्तावेजों में कथित तौर पर हेराफेरी की गई और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया।

दस्तावेजों के अनुसार संबंधित भूमि का एवार्ड अलियार महतो पिता फागु महतो, देव वसिया देवी पति दुखी महतो, बंधु महतो और रामदास महतो समेत अन्य के नाम से संबंधित बताया गया है। एवार्ड में कुल अर्जित रकबा करीब 0.697 एकड़ दर्ज है और इसके एवज में 41,18,417 रुपये की राशि भुगतान योग्य दर्शाई गई है।

भू-अर्जन शाखा के उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार लालबिहारी यादव व युगेश्वर प्रसाद यादव समेत संबंधित लोगों की ओर से 1 नवंबर 2021 को मुआवजा भुगतान के लिए दावा प्रस्तुत किया गया था। दावे के साथ खतियान की प्रति, लगान रसीद, इंडेम्निटी बॉन्ड, एलपीसी, सहमति पत्र, केवाला सत्यापन और शपथपत्र समेत कई दस्तावेज लगाए गए थे। भुगतान के लिए युगेश्वर प्रसाद यादव का बैंक ऑफ बड़ौदा, छतरपुर स्थित खाता दर्शाया गया है।

भू-अर्जन अभिलेख से संबंधित अमीन के प्रतिवेदन में भी एवार्ड संख्या दो का उल्लेख है। प्रतिवेदन के अनुसार इस एवार्ड की भुगतेय राशि 41,18,417.90 रुपये बताई गई है। अभिलेख में एलपीसी के आधार पर संबंधित एवार्डियों द्वारा युगेश्वर प्रसाद यादव के खाते में भुगतान राशि डालने की सहमति दिए जाने का उल्लेख भी है। हालांकि परिवादी उमेश यादव ने इसी सहमति प्रक्रिया की वैधता और उससे जुड़े दस्तावेजों की सत्यता पर सवाल उठाया है।

उमेश यादव का कहना है कि जिस जमीन का मुआवजा भुगतान किया गया, उसके खतियान में उनके पूर्वज स्वर्गीय रामदास यादव का भी हिस्सा दर्ज है। रामदास यादव के निधन के बाद उनके वंशज के रूप में उमेश यादव ने अपने हिस्से के अधिकार को लेकर आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि वास्तविक हकदारों को उनके हिस्से की मुआवजा राशि नहीं दी गई और पूरी राशि कथित रूप से एक ही खाते में चली गई।

परिवादी ने बताया है कि मामले को लेकर पहले छतरपुर थाना में आवेदन दिया गया था। कार्रवाई नहीं होने पर पुलिस अधीक्षक, पलामू को भी आवेदन देने का उल्लेख परिवाद में किया गया है। इसके बाद न्यायालय में परिवाद दाखिल कर मामले की जांच और कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।

परिवाद में भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 406, 467, 468, 471, 120बी तथा संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की मांग की गई है। परिवादी ने न्यायालय से आरोपों का संज्ञान लेते हुए विरोधी पक्ष के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई तथा आरोप सिद्ध होने पर सजा की मांग की है। परिवाद के साथ भू-अर्जन वाद संख्या 08/2017-18 से संबंधित नोटिस, आदेश, भूमि धारण प्रमाण पत्र, शपथपत्र, थाना में दिए गए आवेदन और पुलिस अधीक्षक को दिए गए आवेदन की प्रतियां संलग्न किए जाने की बात कही गई है।

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