Wednesday, October 14, 2026

‘बॉर्डर पर शांति के बिना रिश्ते नॉर्मल होना मुश्किल’, चीन को विदेश मंत्री जयशंकर की दो टूक

Must Read

विदेश मंत्री एस जयशंकर का कहना है कि भारत-चीन के रिश्तों में बॉर्डर के हालात काफी मायने रखते हैं। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि बॉर्डर पर शांति के बिना रिश्ते सामान्य होना मुश्किल है।
नई दिल्ली: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने साफ कर दिया है कि बॉर्डर पर शांति स्थापित किए बिना चीन के साथ रिश्ते को सामान्य कर पाना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि बॉर्डर इलाकों में शांति और सुकून ज़रूरी है। जयशंकर ने जोर देकर कहा कि अगर बॉर्डर पर किसी भी तरह की गड़बड़ी होगी तो दोनों देशों के संबंधों पर असर पड़ेगा। दिल्ली में ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम के एडिटर-इन-चीफ जॉन मिकलेथवेट के साथ बातचीत में उन्होंने चीन को लेकर यह बात कही।
भारत और चीन के बीच कोई तय बॉर्डर नहीं
एस जयशंकर ने कहा कि भारत और चीन के बीच कोई तय बॉर्डर नहीं है। यह कोई नया मुद्दा नहीं है; यह कई दशकों से चल रहा है… 1975 से 2020 तक, यानी पूरे 45 साल, उस बॉर्डर पर कोई खून-खराबा नहीं हुआ। आखिरी बार मौतें 1975 में हुई थीं। इस दौरान भारत-चीन के रिश्ते बढ़े। उन्होंने कहा कि 2020 में हालात बदल गए, जब बॉर्डर पर तनाव बढ़ा और झड़प हुई। इस झड़प में दोनों तरफ के सैनिकों की मौत हो गई।

जयशंकर ने आगे कहा. “फिर 2020 में जब हम COVID लॉकडाउन के बीच में थे, तो हमारे बॉर्डर पर कई मसले थे, और इसका नतीजा झड़प में हुआ, जिसमें दोनों तरफ के कई सैनिक मारे गए। हमारे लिए, यह 1975 से चली आ रही स्थिति से बहुत अलग था। अगर बॉर्डर इलाकों में शांति भंग होती है, तो रिश्तों पर इसके नतीजे होंगे। वे नतीजे अगले पांच सालों तक साफ दिखे, जब तक कि हम शांति बहाल नहीं कर पाए। इसमें दोनों पक्षों के बीच चार साल बातचीत हुई।”

चीन के साथ व्यापार असंतुलन
विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि भारत और चीन के बीच मतभेद केवल बॉर्डर तक ही सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में भी गंभीर समस्याएं हैं। उन्होंने भारत-चीन व्यापार संतुलन को एकतरफा बताते हुए कहा कि कई ऐसे क्षेत्र हैं, जिनमें भारतीय कंपनियों ने दुनिया के दूसरे बाजारों में अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन उन्हें चीन में पर्याप्त बाजार पहुंच नहीं मिली है। जयशंकर ने कहा कि भारत को चीन में उस तरह समान अवसर नहीं मिल रहे हैं, जिस तरह भारत ने चीनी कंपनियों को अपने बाजार में अवसर दिए हैं।

प्लीज़ शांति और अमन बनाए रखें
इस सवाल पर कि अगर अर्ली हार्वेस्ट एग्रीमेंट होता है तो क्या भारत ज़्यादा चीनी इन्वेस्टमेंट की इजाज़त देने पर विचार करेगा, विदेश मंत्री ने कहा कि पॉसिबिलिटीज़ पर बातचीत चल रही है, साथ ही यह भी साफ़ किया कि इन्वेस्टमेंट और मार्केट एक्सेस पॉलिसीज़ को बाउंड्री इशू से अलग तरीके से हल किया जाएगा। जयशंकर ने कहा, “यह एक एक्टिव बातचीत है। हम अब उन पॉसिबिलिटीज़ को देख रहे हैं, और हमें देखना है कि हम कहाँ जाते हैं। लेकिन हम इस बात पर ज़ोर नहीं दे रहे हैं कि बिज़नेस करने के लिए आपको बाउंड्री इशू को सॉल्व करना होगा। हम यह कह रहे हैं:प्लीज़ शांति और अमन बनाए रखें। मैं अर्ली हार्वेस्ट को बाउंड्री क्वेश्चन सॉल्यूशन के अलावा किसी और चीज़ से नहीं जोड़ूंगा। बिज़नेस, मार्केट एक्सेस इशूज़, वगैरह, इन्वेस्टमेंट पर हमारी जो भी पॉलिसी है, उस पर हम अलग से डील करेंगे।”

बता दें कि सितंबर की शुरुआत में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था कि भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय संबंध आज पिछले सालों की तुलना में बेहतर हैं, उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे बाकी बॉर्डर मुद्दे धीरे-धीरे सुलझ रहे हैं, रिश्ते नॉर्मल हो रहे हैं। न्यूयॉर्क में एशिया सोसाइटी द्वारा होस्ट की गई एक बातचीत के दौरान जयशंकर ने भारत-चीन संबंधों के हालिया संबंधों पर जयशंकर ने यह बात कही थी।

- Advertisement -spot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_img
Latest News

हूती हमलों के बीच सऊदी अरब के समर्थन में आया पाकिस्तान, शहबाज शरीफ ने दिया सुरक्षा का भरोसा

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और सऊदी अरब पर हूती हमलों के बीच पाकिस्तान ने उसकी सुरक्षा के प्रति...
- Advertisement -spot_img

More Articles Like This

- Advertisement -spot_img