अमेठी। उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले से पारिवारिक संपत्ति विवाद का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है, जहां 75 वर्षीय बुजुर्ग और दिव्यांग महिला ने अपने ही देवर और देवरानी पर पति को बहलाकर पूरी जमीन अपने नाम कराने, बेटे की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत और पति की मृत्यु की सूचना तक छिपाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता ने जिलाधिकारी अमेठी को प्रार्थना पत्र देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने तथा अपनी पुश्तैनी भूमि और मकान वापस दिलाने की मांग की है।
पीड़िता शिवकुमारी पत्नी स्वर्गीय रवीन्द्र नारायण तिवारी, ग्राम भोजा पुरवा, थाना शुकुल बाजार, जिला अमेठी की रहने वाली हैं। अपने प्रार्थना पत्र में उन्होंने बताया कि उनके पति शुकुल बाजार में घड़ी की दुकान चलाते थे। आरोप है कि उनके देवर चन्द्र नारायण तिवारी और देवरानी कान्ती देवी ने लगातार उनके पति को उनके खिलाफ भड़काया, जिससे परिवार में आए दिन विवाद और मारपीट होने लगी। शिवकुमारी का कहना है कि उन्हें प्रताड़ित किया गया और उनकी जान को खतरा पैदा हो गया, जिसके कारण उन्हें अपने 17 वर्षीय पुत्र प्रवीन और पति को छोड़कर बाराबंकी जिले के रामसनेहीघाट क्षेत्र स्थित अपने मायके में शरण लेनी पड़ी।
प्रार्थना पत्र में सबसे गंभीर आरोप यह लगाया गया है कि मायके में रहने के दौरान उनके 17 वर्षीय पुत्र को कथित रूप से जहर देकर मार दिया गया और इसकी सूचना भी उन्हें काफी देर बाद दी गई। शिवकुमारी का कहना है कि उन्होंने इस मामले में शिकायत की थी, लेकिन प्रभावशाली लोगों के कारण कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
महिला ने यह भी आरोप लगाया है कि इसी दौरान उनके देवर और देवरानी ने कथित रूप से षड्यंत्र रचकर उनके पति से पूरी भूमि और संपत्ति अपने नाम लिखवा ली। इसके कुछ समय बाद उनके पति की मृत्यु हो गई, लेकिन उन्हें पति के निधन की सूचना तक नहीं दी गई। बाद में जब उन्हें पूरे मामले की जानकारी हुई और उन्होंने विरोध किया तो आरोप है कि उन्हें घर से भगा दिया गया तथा जान से मारने की खुली धमकी दी गई।
बुजुर्ग महिला का कहना है कि अब उनके पास न रहने के लिए अपना घर बचा है और न ही जीवनयापन का कोई सहारा। उन्होंने जिलाधिकारी से मांग की है कि पूरे मामले की गहन जांच उपजिलाधिकारी अमेठी से कराई जाए, सभी तथ्यों की निष्पक्ष पड़ताल की जाए और यदि आरोप सही पाए जाएं तो संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही उनकी पैतृक भूमि और मकान को सुरक्षित रखते हुए उन्हें उनका वैधानिक अधिकार दिलाया जाए।
पीड़िता ने प्रशासन से भावुक अपील करते हुए कहा है कि वह 75 वर्ष की बुजुर्ग और दिव्यांग महिला हैं। जीवन के इस अंतिम पड़ाव पर उन्हें न्याय की सबसे अधिक आवश्यकता है। उन्होंने शासन और प्रशासन से अनुरोध किया है कि उनकी शिकायत को गंभीरता से लेते हुए उन्हें उनकी जमीन, मकान और कानूनी अधिकार वापस दिलाए जाएं, ताकि वह सम्मानपूर्वक अपना शेष जीवन अपने घर में बिता सकें।



