Tuesday, November 3, 2026

घर-दुकान में घुसने को तरस रहे नसीर, दामाद से संपत्ति विवाद ने लिया कानूनी मोड़

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बलरामपुर। तुलसीपुर थाना क्षेत्र के ग्राम पिपरहवा विशुनपुर में मकान, दुकान, जमीन और पेड़ को लेकर चल रहा पारिवारिक विवाद अब पुलिस से लेकर न्यायालय तक पहुंच गया है। गांव निवासी मो. नसीर पुत्र गिरदावल का कहना है कि जिस घर और दुकान को वह अपनी संपत्ति बताते हैं, उसी में प्रवेश करने से उन्हें रोका जा रहा है। पीड़ित का दावा है कि उन्होंने मामले को लेकर अधिकारियों से कई बार शिकायत की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। अब उन्होंने प्रशासन से हस्तक्षेप कर उन्हें उनका घर और संपत्ति वापस दिलाने की मांग की है।

नसीर द्वारा दिए गए प्रार्थना पत्रों के अनुसार उनका अपनी पहली पत्नी किताबुन्निशा और दामाद निजाम पुत्र अकबाल के साथ संपत्ति को लेकर विवाद चल रहा है। नसीर का कहना है कि निजाम कथित रूप से उनकी दुकान पर कब्जा किए हुए हैं और दुकान खाली करने के लिए कहने के बावजूद उसे खाली नहीं किया जा रहा। प्रार्थी ने प्रशासन से कथित अवैध कब्जा और हस्तक्षेप हटवाकर दुकान वापस दिलाने की मांग की है।

इसी विवाद में खेत में लगे पेड़ को लेकर भी शिकायत की गई है। नसीर के अनुसार उन्होंने अपने खेत में पेड़ लगाए थे और उनमें से एक पेड़ काटने के बाद उसे खेत से उठाकर ले जाने का प्रयास किया जा रहा था, लेकिन निजाम द्वारा कथित रूप से इसमें बाधा डाली जा रही है। नसीर का कहना है कि पेड़ और खेत से निजाम का कोई अधिकार या संबंध नहीं है। उन्होंने उपजिलाधिकारी से अवैध हस्तक्षेप हटवाकर पेड़ उठाने की अनुमति दिलाने की मांग की है।

मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि संपत्ति को लेकर दोनों पक्षों के दावों में विरोधाभास सामने आया है। पुलिस की न्यायालय को भेजी गई रिपोर्ट में कहा गया है कि नसीर ने अपनी पुत्री की बीमारी के कारण मृत्यु होने के बाद अपने दामाद निजाम को मकान और दुकान दानपत्र के माध्यम से दे दिया था। पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक अब नसीर उस दानपत्र को नहीं मानते हुए मकान और दुकान वापस चाहते हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि निजाम द्वारा न्यायालय में दावा वाद संख्या 69/26 दाखिल किया गया है, जो विचाराधीन है।

दूसरी ओर, न्यायालय में दिए गए नसीर के कथन में दानपत्र को फर्जी और कूटरचित बताया गया है। नसीर के अनुसार जब वह मुंबई से वापस घर आए तो उन्हें घर में प्रवेश नहीं करने दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि निजाम, किताबुन्निशा और अन्य लोगों ने उनके साथ गाली-गलौज और मारपीट की तथा धमकी देकर वहां से चले जाने को कहा। नसीर ने यह भी आरोप लगाया कि उनकी दूसरी पत्नी रेहाना बेगम और बेटी को घर से निकाल दिया गया।

नसीर के मुताबिक गांव में पंचायत बुलाकर मामले को सुलझाने का प्रयास भी किया गया, लेकिन विवाद का समाधान नहीं हुआ। उनका आरोप है कि विपक्षी पक्ष ने 25 दिसंबर 2015 का दानपत्र दिखाते हुए मकान और जमीन पर अपना अधिकार बताया। नसीर ने न्यायालय के समक्ष इस दस्तावेज को फर्जी बताते हुए जांच की मांग की। उन्होंने परिवार रजिस्टर की एक नकल को लेकर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि उनके नाम-पते और परिवार से संबंधित दस्तावेजों में कथित रूप से हेरफेर किया गया है।

मामले की पुलिस जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि नसीर की पहली पत्नी किताबुन्निशा ने दूसरी शादी के बाद खर्चा नहीं दिए जाने को लेकर न्यायालय में वाद दायर किया है, जो विचाराधीन है। पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि स्थानीय थाने पर इस प्रकरण में कोई अभियोग पंजीकृत नहीं है और मामला संपत्ति एवं पारिवारिक विवाद से जुड़ा हुआ है।

नसीर की ओर से धारा 173(4) बीएनएसएस के तहत न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया गया था। अपर सिविल जज प्रवर खंड/अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट बलरामपुर की अदालत में प्रकरण विविध मुकदमा संख्या 03/2026 के रूप में सामने आया। नसीर ने विपक्षी पक्ष के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर विवेचना कराए जाने की मांग की है। उपलब्ध न्यायालयी दस्तावेज में दोनों पक्षों के कथनों और प्रस्तुत कागजात का उल्लेख किया गया है।

इस पूरे विवाद में 25 दिसंबर 2015 के कथित दानपत्र की भूमिका अहम दिखाई दे रही है। एक तरफ नसीर वर्तमान में मकान और दुकान पर अपना अधिकार बताते हुए कब्जा वापस दिलाने की मांग कर रहे हैं, वहीं पुलिस रिपोर्ट में दानपत्र के आधार पर निजाम को संपत्ति दिए जाने की बात दर्ज है। दूसरी तरफ नसीर न्यायालय में इस दस्तावेज की वैधता पर सवाल उठा चुके हैं। ऐसे में संपत्ति पर वास्तविक अधिकार का अंतिम निर्धारण संबंधित न्यायालय और सक्षम राजस्व प्राधिकारी द्वारा दस्तावेजों एवं साक्ष्यों के आधार पर किया जाना है।

पीड़ित मो. नसीर का कहना है कि वह अपने ही घर में प्रवेश नहीं कर पा रहे हैं और कई स्तरों पर आवेदन देने के बावजूद उन्हें राहत नहीं मिली। उनका प्रशासन से कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जाए और यदि उनके साथ अन्याय हुआ है तो समय रहते उन्हें उनका घर और अधिकार वापस दिलाया जाए।

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