Wednesday, October 21, 2026

आवास दिलाने के नाम पर 10 हजार लिए, तीन साल बाद भी न आवास मिला न रकम वापस; ब्याज पर पैसे लेकर दिए थे, अब जर्जर मकान में परिवार की मुश्किलें बढ़ीं

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मुखिया संजय पर गरीब महिला से आवास के नाम पर रकम लेने का आरोप, पीड़िता बोली पैसे वापस मांगने पर कहा ना पैसा मिलेगा ना आवास, जो करना है कर लो

देवघर जिले के मधुपुर क्षेत्र में सरकारी आवास का लाभ दिलाने के नाम पर गरीब महिला से 10 हजार रुपये लिए जाने का मामला सामने आया है। पीड़ित सबिरन खातून, पत्नी मोहम्मद सनाउल अंसारी, निवासी ग्राम तुलसीडाबर, पोस्ट बामनगामा, बभंगंवान, देवघर, मधुपुर, झारखंड का आरोप है कि करीब तीन वर्ष पहले गांव के मुखिया संजय मुखिया ने आवास दिलाने के नाम पर उनसे 10 हजार रुपये लिए थे। पीड़िता का कहना है कि परिवार ने यह रकम ब्याज पर पैसे लेकर दी थी, ताकि उन्हें आवास योजना का लाभ मिल सके।

पीड़िता के अनुसार रकम लेने के समय उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि आवास दिला दिया जाएगा। इसी भरोसे में परिवार ने किसी तरह पैसों का इंतजाम किया और 10 हजार रुपये दे दिए। लेकिन तीन साल गुजर जाने के बाद भी आवास का लाभ नहीं मिला। पीड़िता का आरोप है कि आवास के संबंध में पूछने पर उन्हें लगातार आश्वासन देकर टालमटोल किया जाता रहा।

तीन साल बाद मांगी रकम तो भी नहीं लौटाए पैसे

सबिरन खातून का कहना है कि जब लंबे समय तक आवास नहीं मिला तो उन्होंने संबंधित व्यक्ति से कहा कि यदि आवास नहीं दिलाया जा रहा है तो कम से कम उनके 10 हजार रुपये वापस कर दिए जाएं। उनका कहना है कि परिवार ने यह रकम ब्याज पर लेकर दी थी, इसलिए पैसे वापस नहीं मिलने से उन पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है।

पीड़िता के मुताबिक गांव के कुछ लोगों ने भी मामले में हस्तक्षेप करते हुए कहा कि परिवार गरीब है और यदि आवास नहीं मिल रहा है तो उनसे लिए गए पैसे वापस कर दिए जाएं। लेकिन आरोप है कि इसके बावजूद रकम वापस नहीं की गई।

पीड़िता का आरोप है कि पैसे मांगने पर उन्हें कथित तौर पर यह जवाब दिया गया कि ना तो पैसे वापस होंगे और ना ही आवास बनेगा, जो करना है कर लो। इस कथित जवाब के बाद पीड़ित परिवार खुद को असहाय महसूस कर रहा है।

ब्याज पर लिए थे पैसे, अब मूल रकम के साथ बढ़ रही परेशानी

पीड़िता का कहना है कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर है। आवास की उम्मीद में 10 हजार रुपये ब्याज पर लेकर दिए गए थे। उन्हें उम्मीद थी कि सरकारी आवास मिलने के बाद परिवार को जर्जर मकान से राहत मिल जाएगी, लेकिन तीन साल बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। अब एक तरफ ब्याज पर लिए गए पैसे का दबाव है और दूसरी तरफ आवास नहीं मिलने से परिवार की परेशानी लगातार बढ़ रही है।

बारिश में जर्जर मकान बना मुसीबत

सबिरन खातून के अनुसार उनका वर्तमान मकान काफी जर्जर हो चुका है। बारिश के मौसम में परिवार को इसी मकान में रहने में भारी परेशानी होती है। घर की खराब स्थिति के कारण बारिश के दौरान परिवार की चिंता और बढ़ जाती है। पीड़िता का कहना है कि आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वह अपने स्तर पर पक्का मकान बनवा सकें। इसी वजह से उन्हें सरकारी आवास योजना से बड़ी उम्मीद थी।

पीड़ित परिवार ने निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की

सबिरन खातून ने संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि आवास दिलाने के नाम पर ली गई रकम की जांच की जाए और यदि उनके आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही पीड़ित परिवार को पात्रता के आधार पर आवास योजना का लाभ दिलाने और उनकी 10 हजार रुपये की रकम वापस कराने की मांग की गई है।

गरीब परिवार का कहना है कि तीन साल तक आवास की उम्मीद में इंतजार करने के बाद भी उन्हें न तो घर मिला और न ही उनके पैसे वापस हुए। ब्याज पर लेकर दिए गए पैसे वापस नहीं मिलने से उनकी आर्थिक परेशानी और बढ़ गई है। अब परिवार अधिकारियों से न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है।

इस मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित मुखिया या अन्य जिम्मेदार पक्ष का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद मामले की पूरी स्थिति स्पष्ट हो

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