Thursday, October 15, 2026

जमीन विवाद में महिला की गोली मारकर हत्या का आरोप, छह महीने बाद राजमिस्त्री को फिर उठाकर जेल भेजने का दावा, परिवार बोला निर्दोष होने के बावजूद नहीं मिल रहा न्याय

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पूर्णिया। धमदाहा थाना क्षेत्र के धरहर जमुनिया गांव में जमीन विवाद से जुड़ा एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि करीब छह महीने पहले गौरी देवी की देर रात गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में परिवार का कहना है कि मृतका की बेटी पार्वती कुमारी ने पुलिस के समक्ष दिए फर्द बयान में जमीन विवाद को हत्या की वजह बताया था और एक युवक पर गोली मारने का आरोप लगाया था। वहीं अब इसी मामले में परिवार के कमाने वाले सदस्य प्रकाश रामानी को आरोपी बनाकर जेल भेजे जाने से परिजन परेशान हैं और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

पुलिस के समक्ष दिए गए फर्द बयान के अनुसार पार्वती कुमारी, उम्र करीब 22 वर्ष, निवासी धरहर जमुनिया, थाना धमदाहा, जिला पूर्णिया ने बताया कि उसकी मां गौरी देवी का सीता देवी के साथ जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। परिवार का दावा था कि वे जमीन के मालिक हैं, जबकि दूसरा पक्ष जमीन का सिकमीदार था। पार्वती के अनुसार 20 सितंबर 2025 को अंचल कार्यालय में आयोजित जनता दरबार के दौरान जमीन विवाद को लेकर उसकी मां को धमकी दी गई थी कि खेत पर जाने पर जान से मार दिया जाएगा।

फर्द बयान के मुताबिक 2 अक्टूबर 2025 की रात करीब 1:45 बजे पार्वती की नींद खुली तो उसने देखा कि उसकी मां के शरीर से खून निकल रहा था और वह गंभीर हालत में पड़ी थी। इसके बाद उसने अपने भाइयों और चाचा को जगाया। स्थानीय स्तर पर जानकारी लेने के बाद पता चला कि गौरी देवी की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। पार्वती ने बयान में कहा कि उसने किसी व्यक्ति को मौके से भागते हुए नहीं देखा था। हालांकि, जमीन विवाद को हत्या की वजह बताते हुए उसने एक युवक पर अपनी मां को गोली मारने का आरोप लगाया था।

इस मामले में धमदाहा थाना कांड संख्या 288/25, दिनांक 04 अक्टूबर 2025 के तहत मामला दर्ज होने का उल्लेख दस्तावेज में किया गया है। मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) समेत अन्य धाराओं के तहत कार्रवाई और अनुसंधान किए जाने की बात सामने आई है।

अब मृतका के परिवार से जुड़े लोगों का कहना है कि हत्या के मामले ने उनके पूरे परिवार की जिंदगी बदल दी है। परिवार का दावा है कि प्रकाश रामानी राजमिस्त्री का काम करता था और परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था। परिजनों के मुताबिक वह करीब छह महीने तक काम करने के बाद अपने रोजमर्रा के काम में लगा हुआ था, तभी घटना के बाद पुलिस उसे पूछताछ के नाम पर अपने साथ ले गई।

परिवार का आरोप है कि प्रकाश रामानी को पहली बार ले जाते समय उन्हें कोई स्पष्ट नोटिस नहीं दिया गया और न ही परिवार की बात ठीक से सुनी गई। परिजनों का कहना है कि बाद में करीब 40 हजार रुपये देने के बाद उसे छुड़ाया गया। लेकिन लगभग दो महीने बाद उसे दोबारा पुलिस ने पकड़ लिया। परिवार के अनुसार बाद में चालान की कार्रवाई करते हुए प्रकाश रामानी को पूर्णिया सेंट्रल जेल भेज दिया गया।

परिजनों का कहना है कि प्रकाश रामानी निर्दोष है और हत्या से उसका कोई लेना-देना नहीं है। उनका आरोप है कि घटना का स्थान उनके घर से करीब चार से पांच किलोमीटर दूर है और इसके बावजूद उसे मामले में फंसा दिया गया। परिवार का कहना है कि प्रकाश के जेल जाने के बाद घर की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई है और परिवार के सामने रोजमर्रा के खर्च तक का संकट खड़ा हो गया है।

पीड़ित परिवार का कहना है कि वे लगातार थाना और जेल के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उनकी परेशानी सुनने वाला कोई नहीं है। परिजनों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, हत्या के वास्तविक कारणों और आरोपों की गहराई से जांच हो तथा यदि प्रकाश रामानी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं तो उसे न्याय दिलाने की दिशा में उचित कार्रवाई की जाए।

परिवार का यह भी कहना है कि मृतका गौरी देवी की हत्या का सच सामने आना बेहद जरूरी है। उनका आरोप है कि जमीन विवाद के कारण पहले से तनाव था और हत्या से पहले धमकी दिए जाने की बात भी सामने आई थी। ऐसे में परिवार चाहता है कि पुलिस सभी पहलुओं, घटनास्थल, गवाहों, पूर्व विवाद और उपलब्ध साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच करे, ताकि वास्तविक दोषी तक पहुंचा जा सके।

फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। हत्या के आरोप और प्रकाश रामानी को आरोपी बनाए जाने को लेकर अंतिम स्थिति पुलिस जांच तथा न्यायालय की कार्यवाही से स्पष्ट होगी। पीड़ित परिवार ने प्रशासन से मामले में निष्पक्ष सुनवाई और न्याय की गुहार लगाई है।

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