SIR को लेकर चुनाव आयोग में मतभेद के दावे को लेकर सियासी बवाल शुरू हो गया है। दूसरी ओर चुनाव आयोग ने इन दावों का खारिज कर दिया है और प्रेस नोट जारी करते हुए कहा है कि आयोग में सभी फैसले बहुमत से लिए गए हैं।
चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया के लेकर सवाल वाली रिपोर्ट पर राजनीतिक विवाद हो रहा है। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, शिवसेना यूबीटी और आम आदमी पार्टी की तरफ से अब तक प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई है। केजरीवाल, अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठा दिए हैं। अब इस पूरे घमासान पर चुनाव आयोग ने सीधा जवाब जारी कर दिया है। चुनाव आयोग ने साफ तौर पर कह दिया है कि आयोग में संविधान के मुताबिक ही काम होता है। आयोग ने कहा कि निर्णय बहुमत से ही हुआ है और सभी फैसले मिलकर लिए गए हैं। चुनाव आयोग ने कहा है कि सिर्फ कुछ ही नोट्स को दिखाया जा रहा है।
ECI ने जारी किया जवाब
भारत निर्वाचन आयोग ने आज एक प्रेस नोट जारी किया है जिसमें कहा गया है:
ECI संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत काम करने वाली संवैधानिक संस्था है। इसमें लिखित नोट, चर्चा और आंतरिक चेक एंड बैलेंस एक सामान्य प्रक्रिया है।
आयोग द्वारा जारी सभी आधिकारिक आदेश और फैसले पूरी कानूनी प्रक्रिया के तहत हैं और The Chief Election Commissioner and Other Election Commissioners Act, 2023 के तहत हैं।
ड्राफ्ट के दौरान सदस्यों द्वारा उठाए गए सवाल / सुझाव वोटर के अधिकारों की सुरक्षा के लिए सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
किसी भी संस्था में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय आना सामान्य है। यह फैसला लेने से पहले की प्रक्रिया है। तीनों आयुक्तों में से सिर्फ एक ही नहीं, हर अधिकारी को सुझाव देने का अधिकार है।
10 महीने में सिर्फ कुछ आंतरिक नोट्स को दिखाना और बाकी फैसलों को नजरअंदाज करना पूरी तस्वीर नहीं है। पिछले एक साल में आयोग ने लगभग 40 नई पहल और कई चुनाव सुधार किए हैं, जिसमें पूरे देश में SIR (Special Intensive Revision) भी शामिल है। ये सभी फैसले पूरे आयोग के सर्वसम्मति से लिए गए फैसले हैं।
आयोग ने हाल ही में बिहार, केरल, तमिलनाडु, पुदुचेरी, असम और पश्चिम बंगाल में बड़े चुनाव सफलतापूर्वक कराए हैं।
ECI के डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे ECINet, सख्त डेटा सिक्योरिटी प्रोटोकॉल के तहत काम करते हैं। वोटर लिस्ट में नाम जोड़ना / हटाना ERO और DEO अपने कानूनी अधिकारों के तहत करते हैं।
चुनाव आयोग पूरी ईमानदारी के साथ अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।
क्यों शुरू हुआ विवाद?
दरअसल, ये पूरा विवाद एक अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद सामने आया है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, SIR को लेकर दोनों चुनाव आयुक्तों एसएस संधू और डॉक्टर विवेक जोशी ने आपत्ति जताई थी। इन्होंने 10 महीने में 14 बार मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को चिट्ठी लिखी थी और फॉर्म-6 में बदलाव और ECInet सॉफ्टवेयर पर ऐतराज जताया था। अखबार का दावा है कि दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्ति को मुख्य चुनाव आयुक्त ने दरकिनार कर दिया था और अपनी मर्जी से SIR की प्रक्रिया शुरू कर दी। अखबार के इस दावे से देश में सियासी बवंडर तेज हो गया है।कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, शिवसेना उद्धव गुट, TMC ममता गुट से लेकर आम आदमी पार्टी तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर हमलावर हो गई हैं।



